मंगलवार, 25 नवंबर 2008

भारत मे बने शहीदों की याद मे बने स्मारकों की सचाई


क्या आप जानते है की भारत मे जयादा तर शहीद स्मारकों की सचाई क्या है । कभी आप ने शहीद स्मारकों को गोर से देखा है । ऐसा ही एक स्मारक है बदल की सराय मे जिस पर आज भी हिन्दुस्तानी मोमबती और धुप्बती भी लगाते है । पर बास्तव मे बह एक तोडी कुते की कब्र है इसे हमारी गुलामी की जिन्दगी नही कहेगे तो और क्या कहेगे के आज भी हमारी छाती पर तोडी कुतो के स्मारक है । क्या आपको पता है कि इंडिया गेट किसकी याद में बना है? आप कहेंगे कि शहीदों की याद में। पर आपको जब पता चलता है कि यह प्रथम विश्वयुद्ध में अंग्रेज साम्राज्य की रक्षा के लिए मरने वाले सिपाहियों की याद में बना है जिसकी नींव 10 फरवरी 1921 में डाली गई थी और 1931 में जब भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरू को फांसी दी जा रही थी तो इन शहीदों का हत्यारा लार्ड इरविन ने राष्ट्रीय स्मारक घोषित करके इसे भी हमारे मत्थे पर जड़ दिया था। यह कह कर कि यह है भारत की राष्ट्रीय निशानी, साम्राज्य की वफादारी। इंडिया गेट पर खुदे नामों में एक भी नाम हमारे स्वाधीनता आंदोलन के शहीदों का नहीं है।






































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